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जन्माष्टमीच्या शुभेच्छा

जनमसे अपनी लीला दिखानेवाले ये कृष्ण किसे ना भाए।
माँ देवकीकी कोख में जनमे देवकीनंदन तो सबके मन में

समाये।।

टोपरी में बैठ यमुनापार गये ये वासुदेवपुत्र किसे ना भाए।
गोकुलमें नंद के घर पले बडे नंदलाल तो सबके मन में समाये।।

पुतना का संहार करनेवाला ये अभ्यंकर किसे ना भाये।
यशोदामैय्या को तरसानेवाले बालकृष्ण तो सबके मनमें समाये।।

मूंह खोल ब्रह्मान्ड दिखानेवाले ये विश्वरूप किसे ना भाये।
चुराके माखन खानेवाले ये माखनचोर तो सबके मन में समाये।।

गोपीयोंकी मटकीयां फोडनेवाले ये कन्हैय्या किसेना भाये।
बालगोपालोसंग गैयां चरानेवाले गोपाल तो सबके मनमें समाये।।

मुरलीके सुरोसे राधाको लुभानेवाले ये मुरलीधर किसेना भाये।
सावले मोहक श्याम तो सबके मन में समाये।।

एक उंगलीपे पुरा गोवर्धन उठानेवाले ये जगदीश किसे ना भाये।
कालिया मर्दन करनेवाले निरंजन तो सबके मन में समाये।।

कंस का वध करनेवाले ये अनंतजीत किसे ना भाये।
द्वारका के राजा द्वारकाधीश तो सबके मन में समाये।।

रुक्मिणी को भगानेवाले ये मोहन किसे ना भाये।
शिशुपाल का सर कांटनेवाले सुदर्शनधारी तो सबके मनमें समाये।।

सुदामा के मित्र केहलानेवाले माधव किसे ना भाये।
द्रौपदी को वस्त्र देनेवाले नारायण तो सबके मन में समाये।।

युद्धभूमी में अर्जुन के रथ का सारथ्य करनेवाले पार्थसारथी किसे ना भाये।
भावनावो में उलझे अर्जुन को गीता पढाणेवाले श्री भगवान श्रीकृष्ण तो सबके मन में समाये।।

जन्माष्टमी की ढेर सारी शुभकामनाये!!

- D for Darshan

 

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