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Mohammad Rafi

ना_फंकार_तुझसा_तेरे_बाद_आया
मोहम्मद_रफी_तू_बहोत_याद_आया

बचपन मे जब भी अंताक्षरी खेला किया करते और किसी पे 'ब' आता तो सबका पसंदीदा और जाना पेहचाना गाना गाया जाता - बहारो फुल बरसावो मेरा मेहबूब आया है! उमर इतनी कम थी की जो दिख रहा है बस उसी को सच मान के दिमाग काम करता था! दूरदर्शन के ऐतवार वाले 'रंगोली' प्रोग्रॅम में सुरज मूव्ही के राजेंद्र कुमार पे चित्रित ये गाना दिखाया जाता और ओ गाना राजेंद्र कुमार ने ही गाया है ऐसे ही मै मान के चलता! जब थोडा बहोत समझमें आने लगा तब पता चला था के प्लेब्याक सिंगिंग करके कोई कन्सेप्ट रेहती है जीसमे गाना पेश तो कोई और करता है पर पिछे गा कोई और रेहता है! थोडी जानकारी के बाद पता चला था के इस गाने का सिंगर कोई रफी करके है! शायद रफी का नाम कानो पर आने का ओ पेहलाही अवसर था!

जैसे जैसे उमर बढती गई वैसे वैसे नये जमाने के नये गाने जादा सुनने में आने लगे! खासकर कुमार सानू, उदित नारायण और अलका यागणिक इन तीन लोगों का आवाज उस नायनटीज के जमाणे की आवाज मानी जाती! सोनू निगम, शान, अभिजित जैसे सिंगर भी बदलते जनरेशन्स के साथ अपनी आवाज को अपनी पेहचान बना रहे थे! नये गाने पसंद तो आते थे, हरपल गुनगुना भी लिया करते थे पर तब भी मन में पुराने गानों के प्रति प्रेमभाव बिलकुल भी कम ना हुआ था! पर हम कैसे नये जमाने के साथ चलनेवालों में से है ये इमेज बनाये रखने के लीये पुराने गानों के प्रती अपनी चाहत खुले आम पेश करना अक्सर टाल देता था!

फिर एक दिन एक ऑडिओ कॅसेट मेरे हाथ लगी, जीसमे आवाज तो मेरे उस जमाने के पसंदीदा सिंगर सोनू निगम की थी पर गाने महंमद रफी सहाब के थे! उन गानों में मेहबूब ने अपने मेहबूबा की जितनी हो सके उतनी तारीफ की थी! ऊन चंद गानों में से कुछ गाने थे,

बहारो फुल बरसावो मेरा मेहबूब आया है
आने से उसके आये बहार जाने से उसके जाये बहार
ना झटको झुल्फ से पानी ये मोती फुंट जायेंगे
खुदा भी आसमा से जब जमी पे देखता होगा
ओ मेरे शाहेखुबा ओ मेरी जानेजनाना
कलियों ने घुंगट खोले हर फुल पे भवरा डोले
इक ना इक दिन ये कहानी बनेगी

ऐसे एक सो बढकर एक नगमो का ओ कॅसेट कई दिनो तक मेरे टेप रीकॉर्डर मे उलटा फुलटा होता रहा, ओ तब तक होता रहा जब तक उन सभी नगमो की हर एक लाईन मैने रट ली हो! एक सिंगर ने दुसरे सिंगर के दोहराये हुये गानों में इतना दम है तो उस ओरिजिनल सिंगर के ओ ओरिजिनल गाने कितने दमदार होगे बस ये सोचकर मै दंग रेह गया और रफीदा के बेहतरीन नगमो की कई सिडीया खरीद ले आया!

सोनूजी की आवाज मे सुने इन नगमो के अलावा मेहबुबा की तारीफ में गाये चौधवी का चांद हो, तारीफ करू क्या उसकी, ये चांद सा रोशन चेहरा, ये गुलबदन, तेरे हुसन की क्या तारीफ करू, मैने पूछा चांद से, गुलाबी आंखें जो तेरी देखी जैसे और कई रफीसाब ने गाये नगमे सून रफीसाब की रोम्यांस वाली आवाज का मै दिवाना हो गया! किसीकी तारीफ मे कोई गाये तो बस महंमद रफी ही गाये बस ऐसेही मेरे मन ने मान लिया!

रफीसाब ने गाई तारीफ जैसे दिल को भा जाती थी वैसेही उन्होने गाया दर्द भी दिल को छुताही नही तो बस रुलाही देता था! ओ दुनिया के रखवाले सून दर्दभरे मेरे नारे, क्या हुआ तेरा वादा, जिंदगी नाम है वक्त की मार का, कारवा गुजर गया गुबार देखते रहे, आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज ना दे, नसीब में जीसके जो लिखा था, रंग और नूर की बारात किसे पेश करू जैसे ढेर सारे दर्दभरे नगमो में रफीसाब ने भरे दर्द की ना तो कोई सीमा थी और ना ही उसे किसीसे तोला जा सकता! गानों में से दर्द का जीकर करे तो रफीसाब करे ही करे! खुश रहे तू सदा ये दुवा है मेरी, बाबूल की दुवाये लेती जा, चलो रे डोली उठावो कहार जैसे गाने सुने तो बस यही लगता की बीदा भी करे तो रफीसाब ही करे!

अभी ना जाओ छोडकर के दिल अभी भरा नही, इक शेहनशाह ने बनवाके हंसी ताजमहल, तुझे जीवन की डोर से बांध लिया है, उडे जब जब जुल्फे तेरी, झिलमील सितारों का आंगन होगा जैसे कई सदाबहार ड्युएट्स सुने तो लगे किसी भी फिमेल व्हॉइस को मेल व्हॉइस की जोड दे तो रफीसाब ही दे!

देश की आझादी के बाद लाहोर के रफी दा हिंदुस्तान को अपना देश चुननेवाले, सुनो सुनो ये दुनिया वालों बापू की ये अमर कहानी सुनाने वाले रफी दा ने लगभग सौ से भी जादा प्याट्रीओटीक गाने गाये! जिनमे अपनी आझादी को हम हरगिझ भुला सकते नहीं, ये देश है वीर जवानो का, सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, ये वतन ये वतन जैसे बस सूनते ही रुह रुह में देश के प्रती प्यार जगानेवाले कई गाने शामिल थे! रफीसाब ने गाया कर चले हम फिदा जानो तन साथीयो, अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयो गाना तो जीस दिन पेहली बार मैने सुना था उसके बाद कई दिन तक बस ओ एक ही गाना मेरी प्लेलिस्ट में रिपीट मोड पर चलता रहा था!

रफीसाब ने कुछ मराठी भी गाने गाये है ये बात मुझे बहोत देर से पता चली थी! शोधिसी मानवा राऊळी मंदिरी, प्रकाशातले तारे तुम्ही अंधारावर रुसा हसा मुलांनो हसा जैसे उनके गाये मराठी गाने भी कई दिनों तक मेरी प्लेलिस्ट लीड करते रहे थे!

मुझको मेरे बाद जमाना ढुंडेगा इस गाने मेसे मानो फिल्मजगत मे प्लेब्याक सिंगिंग का ट्रेंड लानेवाले, बचपन में गांव के फकीर के पिछे गाते गाते बडे हुये और बाद मे अपनी आवाज से लोगों के दिलों पे राज किये महंमद रफी ने मानो अपना भविष्य ही बया किया था! उनके गाये अनगीनत सदाबहार, बेहतरीन नगमो का गुबार, ओ हसीन यादे, उनको गुजरे जमाना होने के बाद भी लोग ढुंड ही रहे है! संगीत के हर फन का ओ फंकार कुछ ही दिन पेहले उन्हे मीलने गये महंमद अझिजजी ने उनकी याद मे गाये "ना फंकार तुझसा तेरे बाद आया" गाने के बोलों के माफिक ना ही आया है और शायद ही आयेगा!!

रफीसाब, आज भी आप हमारे बीच हो! आपके नगमे, आपकी आवाज, आज भी हमारे ईर्द गर्द गुंजती है और गुंजती रहेगी!!

जनमदिन मुबारक हो रफीसाब!! 

- D For Darshan

 

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