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Tribute to legend KishorDa on an occasion of his thirty first death anniversary!!

Tribute to legend KishorDa on an occasion of his thirty first death anniversary!!

जीसने जिंदगी_एक_सफर_है सुहाना गाके जिंदगी जिने का हसीन तरीका बताया,

उसीने जिंदगी_का_सफर है ये कैसा सफर गाके जिंदगी का दर्द सुनाकर लोगोंको रुलाया!

जीसने गम के सागर को पार करने की उम्मीद दिलो में जगाणे के लिये जिंदगी_प्यार_का_गीत_है ये गीत गाया,
उसीने इक_रास्ता_है_जिंदगी गाके जो थम गये तो कुछ नही वाला संदेश सुनाया!

हार के बाद ही जीत है बताकर जीसने जिंदगी_की_अजीब_रीत सुनाई,
सफर में गुजर जानेवाले मकाम फिर नही आते ये सिख इसने जिंदगी_के_सफरमे गाके दोहराई!

निगाहोंमें सपने लेकर अपनी राहोमे जिंदगी_आ_रहा_हूँ मैं गाते ओ आया
जिंदगी_जुआ_है तो जुये जैसे जीतहार करके जिले ऐसे गाके ओ चला भी गया!

आज ही की तारीखपे, तकरीबन तीस साल पेहले, जिंदगी को अलविदा कर चल पडे #आभास गांगुली यानें लाडले किशोरदा!

इत्तफाक से आज का दिन नवरात्री का तिसरा दिन भी था, 
नवरात्री के नौ रंगो में से ग्रे याने कोरा रंग जीस दिन का प्रतीक था!

नवरात्री मे बेशक इस रंग का अपना कुछ वजुद होगा, 
पर किसी भी रंग मे से अगर उस रंग का प्रभाव पुरी तरह से घटा दिया जाये तो जो हाथ लगता है ओह रंग आमतौर पर कोरा ही होगा!

किशोरदा का इस संसार से हमेशा के लिये चला जाना उनके अनगीनत चाहनेवालो के लिये जिंदगीमे एक प्रकार का कोरापन लाने से कम ना था,
इसिलिये आज का नवरात्री के बहाने पेहना ये कोरा याने ग्रे रंग किशोरदा के ना होने का 'आभास' भी दिला रहा था!

ऐसे इत्तफाक वाले दिन पे दा का गाया कुछ ना गाये तो क्या जिये,
दा के इन अनमोल गानों को समझकर चलो कुछ सिख भी लेले!

जैसे ये गाये गाणे की चंद पंक्तीया बोलती है कि,

"जैसे परबत पे घटा झुकती है,
जैसे सागर मे लेहर उठती है"

कुछ वैसेही,

किसी को जीने के लिये ये जिंदगी मिलती है,
उससे दी गई जिंदगी इक दिन मौत छिन भी लेती है!

ना तो हम ओ घटा रोक पाते है, ना ही ओ लेहर
ना तो मिला जनम हमारे हाथ मे है ना मौत का कहर,
जो मिला है हमे उसे शौक और शान से जिले
कल की हमे फुरसत कहा सोचे जो हम मतवाले!

बस.....किशोरदा के कई गानों जैसे!!

- D for Darshan

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